लालू परिवार समेत 16 आरोपियों पर चार्ज तय करने पर 6 मई को होगी सुनवाई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना


नई दिल्ली : आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने अहम फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने को लेकर कोर्ट अब अगली तारीख पर अपना निर्णय सुनाएगी।


विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने मामले की जटिलता और दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए फैसला तत्काल सुनाने के बजाय उसे टाल दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 6 मई को निर्धारित की गई है, जब यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएंगे या नहीं।


प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा 13 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे सबूत सामने आए हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।


यह मामला उस दौर से जुड़ा है जब 2004 से 2009 के बीच लालू यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे के दो होटलों, जो पूरी और रांची में स्थित हैं, के रखरखाव और संचालन का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया। इसके बदले में पटना में स्थित एक कीमती जमीन कथित तौर पर उपहार के रूप में ली गई।

इस मामले की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो की ओर से दर्ज किए गए भ्रष्टाचार के केस से हुई थी। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की और चार्जशीट दाखिल की।


वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। उनका कहना है कि मामला राजनीतिक प्रेरित है और तथ्यों के आधार पर नहीं टिका है। दूसरी ओर, जांच एजेंसी अपने पक्ष में मजबूत सबूत होने का दावा कर रही है।


अब सभी की नजर 6 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां कोर्ट का फैसला इस बहुचर्चित मामले की आगे की दिशा तय करेगा।