- भाजपा विधायक दल ने सर्वसम्मति से चुना नया नेता, अमित शाह की मौजूदगी में लगी नाम पर अंतिम मुहर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव अब औपचारिक रूप ले चुका है।विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को राज्य का अगला मुख्यमंत्री चुन लिया है। कोलकाता में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर सर्वसम्मति बनी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा की। अब शनिवार को नए मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।
इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार पश्चिम बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया है। पार्टी ने प्रचंड प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही बंगाल की राजनीति में नई सरकार और मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज थीं, जिन पर अब विराम लग गया है।
भाजपा विधायक दल की बैठक विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। बैठक के दौरान कई विधायकों ने शुभेंदु अधिकारी के नाम का समर्थन किया। शाह ने कहा कि विधायक दल की ओर से मिले सभी प्रस्ताव एक ही नाम के पक्ष में थे और किसी अन्य नाम का प्रस्ताव सामने नहीं आया। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता घोषित कर दिया गया।
शुभेंदु अधिकारी इस चुनाव में भाजपा के सबसे बड़े चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने नंदीग्राम सीट के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। भवानीपुर सीट पर उन्होंने ममता बनर्जी को 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया। इससे पहले पिछले विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को पराजित कर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।
शुक्रवार सुबह अमित शाह कोलकाता पहुंचे थे, जहां एयरपोर्ट पर शुभेंदु अधिकारी समेत भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद शाह सीधे न्यू टाउन स्थित होटल पहुंचे और फिर विधायक दल की बैठक में शामिल हुए। अब शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हो सकते हैं।
उधर, चुनाव परिणाम के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा को भंग कर दिया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी मंत्रिपरिषद का कार्यकाल भी समाप्त हो गया। राज्य में नई सरकार के गठन तक प्रशासनिक कामकाज राजभवन की निगरानी में चलाया जाएगा।
चुनाव में हार के बावजूद ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने को लेकर भी बंगाल की राजनीति में तीखी चर्चा रही। आमतौर पर चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार इस्तीफा दे देती है और नई सरकार बनने तक कार्यवाहक भूमिका निभाती है, लेकिन इस बार हालात अलग रहे। अब भाजपा सरकार के गठन के साथ बंगाल में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।