झारखंड से कौस्तुभ कुमार मलयज की खास रिपोर्ट

झारखंड में सक्रिय टीपीसी उग्रवादी संगठन के सुप्रीमो 30 लाख इनामी बृजेश गंजू को उत्तर प्रदेश एसटीएस की टीम ने मारा गिराया है. रविवार की सुबह हुई मुठभेड़ में एटीएस को यह सफलता हाथ लगी है, यह मुठभेड़ वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में हुई है. जिसमें टीपीसी सुप्रीमों कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता मारा गया. मारे गए उग्रवादी कमांडर पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिसमें झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और राष्ट्रीय जांच एजेंसी ANI द्वारा 5 लाख रुपये का इनाम शामिल था।

सुबह पांच शुरू 5 हुई घेराबंदी

एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय के मुताबिक, टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि वांटेड उग्रवादी कमांडर बृजेश गंझू तड़के रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान में टेंगरा मोड़ से मुगलसराय की ओर जाने वाले रास्ते से गुजरने वाला है. सूचना के आधार पर एटीएस टीम ने सुबह करीब पांच बजे क्षेत्र में कड़ी घेराबंदी की. इसी दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा. एटीएस टीम ने जब उसे रुकने का इशारा किया, तो उसने पुलिस टीम पर अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

एटीएस की जवाबी कार्रवाई और शुरू हुई मुठभेड़

उग्रवादी की तरफ से हुई गोलीबारी के बाद पुलिस टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की. दोनों ओर से हुई इस मुठभेड़ में ब्रजेश गंझू को गोली लग गई और वह लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा. एटीएस की टीम तत्काल उसे घायल अवस्था में नजदीकी अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जांच के बाद उसकी पहचान झारखंड के चतरा जिले (थाना लावालौंग) के ग्राम लूटू निवासी बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के रूप में हुई. वह लंबे समय से झारखंड पुलिस और एनआईए की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था।

बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई एटीएस अधिकारियों की जान

मुठभेड़ के दौरान नक्सली की ओर से चलाई गई गोलियां एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण के बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगीं. बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के कारण दोनों अधिकारी गंभीर रूप से घायल होने से बच गए, हालांकि, घटना के बाद एहतियातन दोनों को भी चिकित्सा जांच और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है. स्थानीय पुलिस और एटीएस की टीमें अब इलाके में तलाशी अभियान चला रही हैं तथा मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

30 लाख का इनामी TPC सुप्रीमो ब्रजेश गंझू मुठभेड़ में ढेर पुलिस कैंपों में ठिकाने से लेकर कार्रवाई से बचने के लिए लाइजनिंग तक जानें TPC चीफ के अंत की और वारदात की पूरी कहानी

तृतीय प्रस्तुति कमेटी टीपीसी का सुप्रीमो और 30 लाख रुपये का इनामी उग्रवादी क्रियावादी दुलारचंद गंझू उर्फ ब्रजेश गंझू उर्फ रंजन जी (पिता: स्व. पच्चू गंझू, निवासी लुटू सोहावन, लावालोंग, चतरा) उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सुरक्षाबलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारा गया. पिछले दो-तीन वर्षों से अंडरग्राउंड रह रहे ब्रजेश गंझू की मौत के साथ ही झारखंड और आसपास के इलाकों में दहशत का पर्याय बने टीपीसी के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया है।

NIA की दबिश और दिल्ली तक लाइजनिंग

गणेश गंझू के भाजपा में शामिल होने के ठीक एक साल बाद, यानी वर्ष 2016 में चतरा जिले की प्रमुख कोयला परियोजनाओं (मगध-आम्रपाली) में हो रही करोड़ों की टेरर फंडिंग और लेवी वसूली को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया. चर्चाओं और सूत्रों के मुताबिक, जब एनआईए ने जांच की आंच तेज की, तो ब्रजेश गंझू संगठन को बचाने लाइजनिंग में जुट गया था।

हैरानी की बात यह थी कि कागजों में ब्रजेश गंझू पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था और पुलिस फाइलों में वह फरार चल रहा था, लेकिन हकीकत में उसका ठिकाना और रहने का जगह कई बार सुरक्षाबलों व पुलिस के कैंपों में ही होता था. पुलिस और तंत्र की इसी दोहरी नीति और शह के दम पर उसने चतरा, हजारीबाग, पलामू और लातेहार के कोयला अंचलों में अरबों रुपये का लेवी नेटवर्क खड़ा कर लिया था।

दर्ज है 44 से अधिक संगीन मामले दर्जनों हत्याओं का आरोपी

पुलिस और एनआईए रिकॉर्ड के अनुसार, ब्रजेश गंझू के खिलाफ चतरा और हजारीबाग के विभिन्न थानों सिमरिया, लावालोंग, टंडवा, पिपरवार, सदर, हंटरगंज, गिद्धौर में 44 से अधिक संगीन मामले दर्ज थे।

जाने ब्रजेश गंझू का मुख्य आपराधिक वारदातें

सुरक्षाबलों पर हमला और हथियार लूट: लावालोंग के कोलकोले के पास पुलिस गश्ती दल पर हमला कर बीएमपी-16 (BMP-16) के दो जवानों की हत्या की और उनके एसएलआर व रायफल लूट लिए।

मुखबिरी के नाम पर हत्याएं: 02 फरवरी 2025 को टंडवा के लेम्बुआ जंगल के पास भुनेश्वर साहु की पुलिस मुखबिरी के आरोप में हत्या करवाई

ठेकेदारों और ग्रामीणों की हत्या: 18 जुलाई 2018 को पत्थलगड्डा के मेरमगड़ा में मनरेगा ठेकेदार नागेश्वर गंझू की लेवी के लिए पीट-पीटकर हत्या. इसके अलावा, जेजेएमपी उग्रवादी प्रदीप महतो और भाकपा माओवादी समर्थकों पर जानलेवा हमले कराए।

विस्फोट और रंगदारी 2012 में हंटरगंज के कुसमाही में माओवादी कमांडर धर्मेंद्र यादव के घर को बम से उड़ा दिया, कोयला कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलना उसका मुख्य पेशा बन चुका था।

एनआईए के बढ़ते दबाव के बाद हुआ था अंडरग्राउंड

एनआईए की लगातार छापेमारी, संपत्तियों की जब्ती और टीपीसी के प्रमुख सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद पिछले 2-3 सालों से ब्रजेश गंझू पूरी तरह बैकफुट पर आ गया था. वह झारखंड छोड़कर दूसरे राज्यों में ठिकाने बदल-बदल कर छिप रहा था. आखिरकार, उत्तर प्रदेश के बनारस में उसकी घेराबंदी हुई, जहां मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने उसे ढेर कर दिया।

सोनभद्र-मिर्जापुर सीमा से वाराणसी तक 30 लाख के इनामी और 50 से ज्यादा मर्डर के आरोपी बृजेश गंझू पर रखी जा रही थी निगरानी, लंका मैदान के पास हुई घेराबंदी, एनकाउंटर में हो गया ढेर।

पूर्वांचल के शांत रास्ते और वाराणसी की सुबह रविवार को अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा उठी 

झारखंड में पिछले दो दशकों से सुरक्षा एजेंसियों की नाक में दम करने वाला और राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA समेत कई राज्यों की पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में शीर्ष पर शामिल तृतीय प्रस्तुति कमेटी TPC का सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता आखिरकार उत्तर प्रदेश ATS की गोलियों का शिकार बन ही गया. 30 लाख रुपये का यह इनामी नक्सली भेष बदलकर यूपी में पनाह लेने की फिराक में था, लेकिन यूपी ATS के सटीक खुफिया तंत्र और पुलिस अधिकारियों की टीम ने लंका मैदान के पास हुए एनकाउंटर में उसे ढेर कर दिया।

खुफिया इनपुट मिलने पर ATS अलर्ट मोड में थी

कहानी की शुरुआत हुई कुछ दिनों पहले मिली एक बेहद गोपनीय और पुख्ता खबर से. ATS को लगातार खुफिया इनपुट मिल रही थी कि झारखंड और बिहार के रास्ते कुछ कुख्यात नक्सली उत्तर प्रदेश की सीमाओं में घुसपैठ कर अपने नेटवर्क को मजबूत करने और छुपने का ठिकाना बनाने की कोशिश में हैं. इस इनपुट के मिलते ही ATS के आला अधिकारियों ने भौतिक व इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का जाल बिछा दिया. इसी दौरान सर्विलांस टीम को भनक लगी कि TPC का खूंखार सरगना ब्रजेश गंझू अपने एक करीबी साथी के साथ लगातार भेष बदलकर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे रहा है. झारखंड, बिहार में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण उसने उत्तर प्रदेश को अपना नया ठिकाना बनाने की रणनीति बनाई थी।

सोनभद्र-मिर्जापुर से वाराणसी तक बिछा ATS का स्पाइडर वेब

जैसे ही यह पक्की खबर मिली कि ब्रजेश गंझू सोनभद्र और मिर्जापुर के रास्ते वाराणसी की तरफ बढ़ रहा है, यूपी ATS की विशेष टीमों ने मोर्चा संभाल लिया. सोनभद्र, मिर्जापुर और वाराणसी के सभी सीमावर्ती और संभावित रास्तों पर ATS के कमांडो और सादे कपड़ों में जवान तैनात कर दिए गए. 20 सितंबर की सुबह ATS को सटीक जानकारी मिली कि ब्रजेश गंझू वाराणसी क्षेत्र में दाखिल हो चुका है और रामनगर थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक लंका मैदान की तरफ बढ़ रहा है. सूचना मिलते ही ATS की टीम ने बिना कोई समय गंवाए लंका मैदान और उसके आसपास के पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली।

लंका मैदान में गोलियों की तड़तड़ाहट और बुलेटप्रूफ जैकेट बनी ढाल

ATS के जवान लंका मैदान के आसपास मुस्तैद थे, तभी जीटी रोड की तरफ से एक मोटरसाइकिल पर दो संदिग्ध आते दिखे. जैसे ही ATS की टीम ने सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उन्हें रुकने का इशारा किया, मोटरसाइकिल की पिछली सीट पर बैठे ब्रजेश गंझू और उसके साथी ने अचानक ATS टीम पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. गोलियों की इस अचानक बौछार से बेपरवाह, ATS टीम ने तुरंत मोर्चाबंदी करते हुए आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की. इस दौरान गोलियों की गूंज से पूरा इलाका सहम गया. एनकाउंटर के दौरान पुलिस टीम की अगुवाई कर रहे DSP विपिन कुमार राय और मुख्य आरक्षी नितेंद्र कृष्ण को भी नक्सलियों की सीधी गोलियां लगीं. गनीमत यह रही कि दोनों अधिकारियों ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थीं, जिससे उनकी जान बच गई।

ढेर हुआ 20 साल का आतंक, साथी मौके से फरार

ATS की तरफ से हुई सटीक और ताबड़तोड़ जवाबी गोलीबारी में TPC का सुप्रीमो ब्रजेश गंझू जमीन पर गिर पड़ा. उसे कई गोलियां लगी थीं

इस अफरा-तफरी का फायदा उठाकर उसका दूसरा साथी अंधेरे और गलियों का सहारा लेकर मौके से भागने में सफल रहा. ATS के जवान तुरंत खून से लथपथ ब्रजेश गंझू को उठाकर नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

कौन था ब्रजेश गंझू ?

मारे गए नक्सली ब्रजेश गंझू पुत्र स्व. पांचू गंझू मूल रूप से झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र स्थित ‘लूटू’ गांव का रहने वाला था. वह पिछले 20 सालों से सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त से फरार चल रहा था. शुरुआती दौर में उसने अपने आपराधिक और हिंसक जीवन की शुरुआत प्रतिबंधित नक्सली संगठन CPI(M) माओवादी से की थी. बाद में उसने अलग होकर टीपीसी का गठन किया और उसका सुप्रीमो बन बैठा।