भाजपा ने की यूपी के पांच बचे जिलाध्यक्षों की घोषणा, चंदौली के काशी नाथ सिंह रीपिट किए गए, तो अम्बेडकर नगर, वाराणसी, गोरखपुर महानगर और देवरिया में नए चेहरों पर भाजपा ने खेला दांव

UP Politics : अंत: तमाम उठा-पठक के बाद जातीय समीकरण साधते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने  उत्तर प्रदेश के काशी, अवध और गोरखपुर क्षेत्र के बचे हुए पांच जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी। इनमें अम्बेडकर नगर, वाराणसी, चंदौली, गोरखपुर महानगर और देवरिया के जिलाध्यक्षों के नाम शामिल हैं, जिनमें एक क्षत्रिय, दो पटेल, एक वैश्य बिरादरी और एक दलित चेहरा शामिल है। भाजपा ने चंदौली के काशी नाथ सिंह को रीपिट किया है, तो बाकी जनपदों के सभी जिलाध्यक्षों को पहली बार जिले की कमान सौंप कर राजनैतिक दांव खेला है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने दिलीप देव पटेल को अम्बेडकर नगर, राम सकल पटेल को वाराणसी, काशी नाथ सिंह को चंदौली, रमेश प्रसाद गुप्ता को गोरखपुर महानगर और काली प्रसाद को देवरिया का जिलाध्यक्ष घोषित किया है।

इस नई घोषण के बाद देवरिया जनपद के अब तक भाजपा जिलाध्यक्ष रहे भूपेंद्र सिंह की जगह अब काली प्रसाद ने ले ली है। देवरिया जनपद की सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र के देवकली निवासी काली प्रसाद गांव की पंचायत से लेकर प्रदेश की पंचायत तक प्रतिनिधत्व कर चुके हैं। 1996 से लेकर 2001 तक ब्लॉक प्रमुख, 2000 से 2005 तक क्षेत्र पंचायत सदस्य, 2005 से 2010 तक जिला पंचायत सदस्य, 2006 से 2011 तक जिला योजना समिति के सदस्य और 2017 से 2022 तक सलेमपुर सुरक्षित सीट से विधायक के रूप में जनता की सेवा कर चुके हैं।

काली प्रसाद को भाजपा संगठन का भी पुराना अनुभव है। काली प्रसाद 2009 से 2012 तक भाजपा के जिला मंत्री, तो 2013 में भाजपा प्रदेश परिषद के सदस्य रहने के बाद 2017 से 2019 तक भाजपा जिला महामंत्री और फिर गोरखपुर क्षेत्र क्षेत्रीय मंत्री और फिर राष्ट्रीय परिषद के सदस्य के रूप पार्टी में सेवा दे चुके हैं। यहीं नहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भी पुराना नाता रहा है। काली प्रसाद द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग से प्रशिक्षित कैडर हैं, जिन पर भाजपा ने अपना भारोसा जताकर अब जिले की कमान सौंपी है।