एसकेएमसीएच में धूल फांक रही अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन, रोजाना करीब 100 मरीजों को जांच की जरूरत
मुजफ्फरपुर। मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए खरीदी गई तीन करोड़ रुपये की अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन छह साल से बक्से में बंद है। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय में मशीन को स्थापित तक नहीं किया जा सका। उधर, मरीज जांच के लिए भटक रहे हैं और मेडिकल छात्र आधुनिक तकनीक सीखने से वंचित हैं। यह हाल उत्तर बिहार के प्रमुख चिकित्सा संस्थान श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) का है, जहां दिल्ली-मुंबई जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावों के बीच करोड़ों की मशीन धूल फांक रही है।
जानकारी के अनुसार, एसकेएमसीएच में प्रतिदिन सड़क हादसों में घायल और नस संबंधी बीमारियों से पीड़ित करीब 100 मरीजों को सीटी स्कैन की जरूरत पड़ती है। मशीन चालू होती तो इन मरीजों की जांच अस्पताल में ही मुफ्त या कम खर्च पर हो सकती थी। लेकिन तकनीशियन की कमी और प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर महंगी जांच करानी पड़ रही है। सवाल यह है कि जब मशीन छह साल पहले अस्पताल पहुंच चुकी थी, तो उसे मरीजों के उपयोग में लाने की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं हो सकी?
इस लापरवाही का खामियाजा केवल मरीज ही नहीं, मेडिकल छात्र भी भुगत रहे हैं। चिकित्सा की पढ़ाई में आधुनिक उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण जरूरी होता है, लेकिन छात्र अब तक इस मशीन को चलते देखना तो दूर, इसके संचालन का अनुभव भी नहीं ले सके हैं। सीटी स्कैन मशीन चालू-बंद करने से लेकर जांच की प्रक्रिया समझने तक का प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है।
बताया जाता है कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनने से पहले ही यह मशीन एसकेएमसीएच भेज दी गई थी। लेकिन बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमआईसीएल) की ओर से अब तक इसे अस्पताल प्रबंधन को हैंडओवर नहीं किया गया है। मशीन कब स्थापित होगी और मरीजों को इसका लाभ कब मिलेगा, इसका स्पष्ट जवाब भी फिलहाल नहीं है।
सात सितंबर 2024 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एसकेएमसीएच के सुपर स्पेशियलिटी विभाग का उद्घाटन किया था। उस समय दिल्ली-मुंबई जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। लेकिन हकीकत यह है कि करीब तीन करोड़ रुपये की सीटी स्कैन मशीन आज भी उपयोग में नहीं आ सकी है।
इस संबंध में एसकेएमसीएच की प्राचार्य डॉ. (प्रो.) कुमारी विभा ने बताया कि मशीन स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इंस्टॉलेशन के बाद संबंधित एजेंसी इसे अस्पताल प्रबंधन को हैंडओवर करेगी। अधीक्षक स्तर से विशेषज्ञ तकनीशियन की मांग भी की गई है। फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि छह साल से इंतजार कर रही मशीन आखिर कब मरीजों के काम आएगी?
