आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पत्नी शिवानी और उसके प्रेमी प्रियांशु को दो-दो साल की कैद

बिजनौर/मंडावली : पत्नी के प्रेम संबंध का विरोध, कथित धमकियां और लगातार मानसिक तनाव आखिर एक युवक की जिंदगी पर भारी पड़ गया। करीब चार साल पुराने गौरव आत्महत्या मामले में अदालत ने उसकी पत्नी शिवानी और उसके प्रेमी प्रियांशु को दोषी करार देते हुए दो-दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। प्रियांशु रिश्ते में शिवानी का मौसेरा भाई बताया गया है।

अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी द्वितीय) डॉ. शहजाद अली की अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर फैसला सुनाया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजीत पवार और प्रमोद शर्मा के अनुसार, मामले में गौरव की पत्नी शिवानी और प्रियांशु को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया गया।

मामले की शुरुआत 1 नवंबर 2022 की उस घटना से हुई थी, जब शेखपुरा लाल थाना नहटौर निवासी यादराम का पुत्र गौरव अपने गांव के चंद्र प्रकाश के साथ बाइक से निकला था। गौरव मुजफ्फरनगर में 108 एम्बुलेंस पर चालक के रूप में कार्यरत था। घर से निकलने के कुछ घंटे बाद उसकी बाइक मंडावली थाना क्षेत्र में कोटावाली पुल और वन चौकी के बीच लावारिस हालत में मिली। इसके बाद मंडावली थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई।

मामले की जांच आगे बढ़ी तो गौरव के पारिवारिक जीवन से जुड़ी परिस्थितियां सामने आईं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, गौरव का अपनी पत्नी शिवानी और ससुराल पक्ष के लोगों से विवाद चल रहा था। इसी दौरान पत्नी शिवानी और पहाड़पुर, नहटौर निवासी उसके मौसेरे भाई प्रियांशु के बीच प्रेम संबंध होने की बात भी जांच में सामने आई। यह संबंध शिवानी की शादी के बाद भी जारी रहने का आरोप था।

अभियोजन के मुताबिक, गौरव पत्नी और प्रियांशु के संबंध का विरोध करता था। आरोप है कि विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। गौरव के पिता यादराम सिंह ने भी शिवानी और प्रियांशु से संबंधित एक वीडियो मोबाइल पर देखा था। इसके बाद गौरव के मानसिक तनाव में रहने की बात सामने आई।

लगातार चल रहे पारिवारिक विवाद, मानसिक उत्पीड़न और परिस्थितियों को लेकर अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष साक्ष्य और गवाह पेश किए। मृतक के बहनोई गजेंद्र कुमार की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की और प्रकरण अदालत तक पहुंचा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष को सुनने के साथ पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों तथा गवाहों के बयानों पर विचार किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शिवानी और प्रियांशु को गौरव को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना।