डॉ. ललन तिवारी ‘वैद्य जी’ ने आयुर्वेद और जरूरतमंदों की सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य

मुजफ्फरपुर : सुबह का वक्त हो या दोपहर की भागदौड़, मुजफ्फरपुर के पानी टंकी चौक स्थित जनक आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र में एक शख्स हमेशा उसी ऊर्जा के साथ मरीजों के बीच दिखाई देता है। उम्र चेहरे पर अपने निशान जरूर छोड़ चुकी है, लेकिन कदमों की तेजी और काम करने का जज्बा आज भी किसी युवा से कम नहीं। कोई अपनी वर्षों पुरानी बीमारी लेकर पहुंचा है, कोई इलाज के बारे में सलाह लेने आया है और किसी दूसरे राज्य से फोन पर परामर्श मांगा जा रहा है। इन सबके बीच बेहद सहज अंदाज में मरीजों की बात सुनते दिखाई देते हैं डॉ. ललन तिवारी ‘वैद्य जी’।

सादा पहनावा, सामान्य रहन-सहन और बातचीत में किसी तरह का दिखावा नहीं। पहली मुलाकात में शायद कोई अंदाजा भी न लगा पाए कि सामने बैठा यह व्यक्ति वर्षों से आयुर्वेद के माध्यम से मरीजों की सेवा कर रहा है। जनक आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र के संचालक होने के साथ डॉ. ललन तिवारी बाबा गरीबनाथ हॉस्पिटल से भी आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में जुड़े हैं। उनके जीवन में चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बन चुकी है।

मरीज उनके पास पहुंचता है तो वैद्य जी की कोशिश पहले उसकी परेशानी को विस्तार से समझने की होती है। बीमारी कितने समय से है, पहले क्या इलाज हुआ, खान-पान और दिनचर्या कैसी है-इन सवालों के जरिए वे बीमारी की जड़ तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि आयुर्वेद में केवल लक्षणों को देखकर दवा देना पर्याप्त नहीं है। मरीज की प्रकृति, दिनचर्या और खान-पान को समझना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डॉ. ललन तिवारी का दावा है कि सही समय पर उपचार शुरू हो और योग्य चिकित्सक सही दवा का चयन करे तो आयुर्वेद से कई जटिल बीमारियों में भी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। उनके मुताबिक आयुर्वेद में धैर्य और अनुशासन दोनों जरूरी हैं। दवा लेने के साथ मरीज को चिकित्सक की बताई दिनचर्या और परहेज का भी पालन करना चाहिए।

वैद्य जी की चर्चा केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं है। बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग भी उनसे फोन पर संपर्क करते हैं। कई लोग ऐसे होते हैं जो दूरी या दूसरी मजबूरियों के कारण मुजफ्फरपुर नहीं आ पाते। ऐसे लोगों को वे फोन पर यथासंभव मार्गदर्शन देते हैं और सामान्य चिकित्सकीय परामर्श के लिए कोई शुल्क नहीं लेते। गरीब मरीजों की सहायता करना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

मुजफ्फरपुर के अरुण शाही बताते हैं, “डॉ. ललन तिवारी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे मरीज को केवल मरीज की तरह नहीं देखते। उसकी परेशानी को समझते हैं और बहुत सहज तरीके से बात करते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी जिस ऊर्जा के साथ वे लोगों की सेवा कर रहे हैं, वह प्रेरित करती है।”

रंजना प्रसाद कहती हैं, “वैद्य जी के व्यक्तित्व में सबसे ज्यादा उनकी सादगी प्रभावित करती है। जरूरतमंद व्यक्ति उनसे सलाह मांगता है तो वे आर्थिक स्थिति देखने के बजाय उसकी समस्या को प्राथमिकता देते हैं। दूर बैठे लोगों को भी फोन पर समय देना उनके सेवाभाव को दर्शाता है।”

वहीं आंचल का कहना है, “उनसे मिलने के बाद ऐसा महसूस नहीं होता कि आप किसी ऐसे चिकित्सक के सामने बैठे हैं जो अपनी उपलब्धियां गिनाना चाहता है। वे बहुत साधारण तरीके से बात करते हैं और मरीज का भरोसा बढ़ाते हैं। गरीब और जरूरतमंद लोगों के प्रति उनका व्यवहार विशेष रूप से प्रभावित करता है।”

जनक आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र में दिन गुजरता रहता है। मरीज आते हैं, फोन बजते हैं और सलाह का सिलसिला चलता रहता है। इन सबके बीच वैद्य जी बिना किसी शोर-शराबे के अपने काम में लगे रहते हैं। शायद उनके जीवन की कहानी का सार भी यही है-उम्र बढ़ती रही, लेकिन सेवा का उत्साह कम नहीं हुआ।

डॉ. ललन तिवारी के लिए किसी मरीज का राहत महसूस करना ही सबसे बड़ा संतोष है। साधारण रहन-सहन, ऊंची सोच, जरूरतमंदों की सहायता और आयुर्वेद के प्रति विश्वास ने उन्हें अलग पहचान दी है। वर्षों से चली आ रही उनकी यह यात्रा बताती है कि जब चिकित्सा के साथ सेवा का भाव जुड़ जाए, तो चिकित्सक और मरीज का रिश्ता सिर्फ दवा तक सीमित नहीं रहता।